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अद्भुत संयोग लेकर आ रही महाशिवरात्री

अद्भुत संयोग लेकर आ रही महाशिवरात्री

लखनऊ, 06 मार्च। सात मार्च सोमवार को 54 साल बाद महाशिवरात्रि अद्भुत संयोग लेकर आ रही है। शिवरात्री महादेव की आराधना के लिए श्रेष्ठकर रहेगी। क्योंकि इस बार यह सोमवार को पड़ रही है। यही नहीं इस शिवरात्री में शिव योग, धनिष्ठा नक्षत्र और सोमवार एक साथ पड़ रहे हैं। ऐसे विशेष दिन को देवों के देव महादेव की आराधना का महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। यही कारण है कि इस वर्ष शिवरात्रि का यह अद्भुत संयोग महादेव की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जा रहा है। इससे पहले ऐसा संयोग 1962 में देखने को मिला था। जिसे लेकर भक्तों में भी उत्साह है। ज्योतिषाचार्यो के मुताबिक दोनों संयोग के कारण महाशिवरात्रि में अभिषेक-पूजन विशेष फलदायी होगी। महाशिवरात्रि में त्रयोदशी और चतुर्दशी का शुभयोग होता है। इस शिवरात्रि में दोपहर 11 बजे तक त्रयोदशी है और उसके बाद चतुर्दशी लग जाएगी। सोमवार शिव का दिन है और इस बार की शिवरात्रि में पूजन अर्चन विशेष फलदायी होगा। महाशिवरात्रि में नवग्रह शांति की पूजा करनी चाहिए। शिवरात्री की तैयारियां मंदिरों में शुरू हो गई हैं। शिवरात्री के दिन भगवान की 24 घंटे तक आरती होगी। रात 2 बजे से भगवान शिव का अभिषेक शुरू हो जाएगा। महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में राजधानी का प्रसिद्ध मनकामेश्वर मंदिर, सिद्धनाथ, बुधेश्वर महादेव मंदिर, रत्नेश्वर मंदिर, कोनेश्वर, नागेश्वर और भैरोश्वर मंदिर आदि मंदिरों में महाशिवरात्रि के मद्देनजर तैयारियां पूरी कर ली गई है।
ज्योतिषाचार्य राधेमोहन पाण्डेय बताते हैं कि महाशिवरात्रि व्रत की यह विशेषता है कि इस व्रत को बालक, स्त्री, पुरुष और वृ्द्ध सभी कर सकते है। उन्होंने कहा कि शिवरात्रि मात्र एक व्रत नहीं है, और न ही यह कोई त्यौहार है। सही मायनों में यह एक महोत्सव है। इस दिन देवों के देव भगवान भोलेनाथ का विवाह हुआ था। उसकी खुशी में यह पर्व मनाया जाता है। उन्होंने शिवरात्री की पूजन विधि बताते हुए कहा कि महाशिवरात्रि पूजा विधि के दौरान ‘ओम नमः शिवाय’ एवं ‘शिवाय नमः’ मंत्र का जाप करना चाहिए। ध्यान, आसन, पाद्य, अघ्र्य, आचमन, स्नान, दधि स्नान, घृत स्नान, गंधोदक स्नान, शर्करा स्नान, पंचामृत स्नान, गंधोदक स्नान, शुद्धोदक स्नान, अभिषेक, वस्त्र, यज्ञोपवीत, उवपसत्र, बिल्व पत्र, नाना परिमल दव्य, धूप दीप नैवेद्य करोद्वर्तन (चंदन का लेप) ऋतुफल, तांबूल-पुंगीफल, दक्षिणा उपर्युक्त उपचार कर ’समर्पयामि’ कहकर पूजा संपन्न करें। कपूर आदि से आरती पूर्ण कर प्रदक्षिणा, पुष्पांजलि, शाष्टांग प्रणाम कर महाशिवरात्रि पूजन कर्म शिवार्पण करें। उन्होंने बताया कि शंख से जल, तुलसी का पत्ता, नारियल पानी से अभिषेक, केतकी का फूलउबला हुआ या पैकेट का दूध व इससे बेहतर है आप केवल जल या गंगाजल से अभिषेक करें। उन्होंने कहा कि भगवान शिव वैरागी उन्हें सौन्दर्य से जुड़ी चीजें पसंद नहीं है। हल्दी भी सौन्दर्य वर्धक माना गया है इसलिए हल्दी और केसर भी शिव जी को नहीं चढ़ाएं।

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