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विश्व प्रसिद्ध है लखनऊ का अदब और सौन्दर्य: मुख्य न्यायाधीश

विश्व प्रसिद्ध है लखनऊ का अदब और सौन्दर्य: मुख्य न्यायाधीश
 लखनऊ 19 मार्च। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150वीं वर्षगांठ तथा इसके बाद लखनऊ खण्डपीठ के नवीन भवन के उद्घाटन के मौके पर न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोग, विवादों के निपटारे में तेजी लाने का संकल्प लंे। यही इस अवसर की सफलता होगी। इस नवीन भवन की भव्यता दुनिया के किसी भी न्यायालय भवन से अधिक है। इस बड़ी और भव्य इमारत से इन्साफ की उम्मीदंे भी बढ़ गई हैं, जिन पर हम सबको खरा उतरना होगा। यह बात उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी.एस. ठाकुर ने शनिवार को यहां गोमती नगर में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ के नव-निर्मित भवन के उद्घाटन समारोह में कही। उन्होंने कहा कि लखनऊ का सौन्दर्य और अदब विश्व प्रसिद्ध रहा है। इसमें उच्च न्यायालय का यह नव-निर्मित भवन जुड़ रहा है। वक्त की रफ्तार के साथ बहुत कुछ बदला है। लखनऊ में नयी और पुरानी रवायतें मिली-जुली नजर आती हैं। उन्होंने कहा कि लाखों लोग रोजगार और काम की तलाश में गांव से शहर आते हैं। आबादी के बढ़ने के साथ-साथ लोगों के मसायल भी बढ़े हैं और विवाद भी उपजे हैं। बार और बेंच को मिलजुल कर समस्याओं और विवादों के शीघ्र निस्तारण की ओर ध्यान देना होगा। इस मौके पर राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि उत्तर प्रदेश के न्यायिक इतिहास में यह सप्ताह ऐतिहासिक रहा है। जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह के बाद लखनऊ खण्डपीठ के नवीन भवन का लोकार्पण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस भवन के साथ लोगों की न्याय की उम्मीदें भी जुड़ रही हैं। वादी को त्वरित और सुलभ न्याय दिलाना न्याय प्रणाली के लिए एक चुनौती है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि सुविधाओं के बढ़ने से न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने का कार्य सुगम होगा। उन्होंने कहा कि संविधान के तीनों अंग-कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका को संतुलन बनाकर कार्य करना पड़ता है। इस बात की खुशी है कि संविधान के आधार पर न्याय पालिका चल रही है। उन्होंने बार और बेंच के समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि इन सम्बन्धों के सुदढ़ होने से न्याय पालिका और अच्छे ढंग से चलेगी। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में न्यायाधीशों और अन्य पदों पर नियुक्तियों पर ध्यान देना होगा।
इस मौके पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका में विश्वास की भावना का होना जरूरी है। इन तीनों अंगों के बीच एक-दूसरे का सम्मान करने के साथ-साथ तालमेल कायम रहना भी जरूरी है, ताकि जनकल्याण का कार्य प्रभावित न होने पाए। उन्होंने कहा कि समाजवादी सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने और लोगों को त्वरित इंसाफ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता हमारे देश की न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग हैं। आम जनता को सहज एवं सुलभ न्याय दिलाने में इनकी बेहद खास और अहम भूमिका होती है। राज्य सरकार अधिवक्ताओं की सुविधाओं में भी लगातार इजाफा कर रही है। सभी जनपदों और तहसीलों में अधिवक्ताओं के लिए अधिवक्ता चैम्बर्स बनाने की दिशा में कार्य किया गया है। अधिवक्ताओं के निधन होने पर उनके परिजनों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता को बढ़ाकर 05 लाख रुपए कर दिया गया है। नौजवान अधिवक्ताओं को वित्तीय मदद देने के लिए काॅर्पस फण्ड का गठन किया गया है। जनता को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय मिले, इसके लिए समाजवादी सरकार हर सम्भव कार्य करती रहेगी। साथ ही, न्याय व्यवस्था को मजबूत करने और संसाधनों में बढ़ोत्तरी के लिए भविष्य में भी प्रदेश सरकार का पूरा सहयोग मिलता रहेगा। इसके पूर्व, समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया गया। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश टी.एस. ठाकुर, राज्यपाल राम नाईक, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डाॅ. डी.वाई. चन्द्रचूड़ का स्वागत पुष्प गुच्छ और स्मृति चिन्ह देकर किया गया। इस अवसर पर उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति के.जी. बाला—ष्णन, उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति राकेश तिवारी, एस.एन. अग्निहोत्री, तेज प्रताप तिवारी, राजीव माहेश्वरम, उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त संजय मिश्रा, महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह सहित अधिवक्ता आदि मौजूद रहे।

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