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कथक संध्याः घुंघरू और तबले की जुगलबंदी ने बांधा समां

कथक संध्याः घुंघरू और तबले की जुगलबंदी ने बांधा समां
 
लखनऊ। घुंघरूओं व तबले की जुगलबंदी और शिव वन्दना को कथक में पिरोकर शुक्रवार को मंच पर पेश किया गया। मुंबई से आई नेहा बनर्जी ने राय उमानाथ बली प्रेक्षाग्रह में कथक की तमाम प्रस्तुतियों संग धमाल किया। आगाज सृष्टि के पालनहार भगवान शिव की वंदना डमरू हर कर बाजे… से हुआ। उसके बाद पारम्परिक बंदिशों में तीन ताल 16 मात्रा में पारम्परिक शुद्ध नृत्य से समां बांधा।
इसके बाद नेहा ने ठुमरी में जी रे बिहारी… में राधा-कृष्ण की छेड़छाड़ को नृत्य एवं भावों से दर्शाया। अन्त में अभियन पक्ष व तीन ताल 16 मात्रा में द्रुत लय के अन्तर्गत टुकडे़, तिहाई, परन, परमेलू, गत व निकास पर खूब तालियां बजीं।
राष्ट्रीय कथक संस्थान की ओर से आयोजित ‘कथक संध्या’ मंे गायन में सोमनाथ मिश्र तबले में विवके मिश्र और सितार पर नवीन मिश्र ने संगत दी।

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