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कथक संग्रहालय कला पे्रमियों का तीर्थ स्थल-पं. बिरजू महाराज

कथक संग्रहालय कला पे्रमियों का तीर्थ स्थल-पं. बिरजू महाराज

लखनऊ, 04 फरवरी। पं. बिरजू महाराज के जन्म दिवस के अवसर पर उनके द्वारा संस्कृति विभाग को हस्तान्तरित की गयी पुश्तैनी हवेली कालका बिन्दादीन ड्योढ़ी को कथक संग्रहालय के रूप में विकसित किया गया है। इस संग्रहालय का लोकार्पण प्रदेश की संस्.ति राज्यमंत्री (स्तवंत्र प्रभार) अरूण कुमारी कोरी ने आज यहां किया।
इस अवसर पर श्रीमती कोरी ने कहा कि सभी कथक प्रेमियों के लिए आज का दिन अत्यन्त प्रसन्नता का दिन है। इस स्थान को कथक घराने के संग्रहालय के रूप में विकसित कर प्रदेश सरकार ने अपनी पौराणिक विरासत को संरक्षित करने का उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि इस संग्रहालय से कला प्रेमी, विशेष तौर पर कथक से जुड़े लोग गौरान्वित होंगे। साथ ही इस परम्परा को नये आयाम तक पहुचाने मंे अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे। उन्होंने कहा कि कथक का नाम लेते ही बिरजू महाराज का नाम अपने आप ही सभी के मन में आ जाता है। पं. बिरजू महाराज को देश ही नहीं विदेशों में कई सम्मान प्राप्त हुये हैं। वर्तमान में पंडित जी के अनेक शिष्य हैं, जो इस कला को आगे बढ़ाना के लिए सतत् अग्रसर हैं।
राज्यमंत्री ने कहा कि कालका बिन्दादीन ड्योढ़ी को लखनऊ घराने के कथक संग्रहालय के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें पं. बिरजू महाराज के पूर्वजों, जिन्होंने लखनऊ घराने की शुरूआत कर समृद्ध किया, के वस्त्रों जैसंे- अचकन, शाल, टोपी, कमीज, शेरवानी, साड़ी, पायजामा आदि, खडाऊ, छड़ी, प्रयोग में लाये गये बर्तन, मन्दिर के पुराने विग्रह, रामायण की प्रति, फोटोग्राफ, पोरट्रेट, पुराने संगीत वाद्य आदि को प्रदर्शित किया किया गया है। इसके साथ ही कथक के लखनऊ घराने के विभिन्न आयामों से सम्बन्धित फिल्म, लघु चित्र, वृत्त चित्र, आडियो-वीडियो रिकार्डिंग भी दिखाने की व्यवस्था की गयी है।
श्रीमती कोरी ने कहा कि अवध की संस्कृति देश विदेश में अपने वैशिष्टय के लिए सुविख्यात है। अवध के अन्तिम नवाब, नवाब वाजिद अली शाह के संरक्षण में यहां की कला संस्कृति एवं तहजीब नये आयामों के साथ पल्लवित एवं पुष्पित हुयी। विशेष रूप से कथक नृत्य के क्षेत्र में लखनऊ घराने की विशिष्ट शैली का विकास हुआ। उन्होंने बताया कि लखनऊ घराने की शुरूआत 19वीें सदी में नवाब वाजिद अली शाह के गुरू एवं उनके दरबार में नर्तक ठाकुर प्रसाद महाराजजी से प्रारम्भ हुयी। इसके बाद दुर्गा प्रसाद, बिन्दादीन महाराज एवं कालका प्रसाद ने उसे समृद्ध किया।
कथक सम्राट पं. बिरजू महाराज ने भावविभोर होकर कहा कि अपने पूर्वजों के स्मरण मात्र से ही दिल भर आता है और पुरानी यादें ताजा हो जाती है। उन्होंने कहा कि तमाम लोगों की चाहत थी कि इस स्थल को यादगार स्थल बनाया जायेगा। लोगों की इसी भावना का सम्मान करते हुए इसे कथक संग्रहालय के रूप में विकसित किया गया। यह संग्रहालय कला पे्रमियों के लिए एक तीर्थ स्थल है। उन्होंने कहा कि संगीत ईश्वर को पाने का एक सशक्त माध्यम है।
संस्.ति सचिव, अनीता सी. मेश्राम ने कहा कि कालका प्रसाद जी के पुत्रों अच्छन महाराज, लच्छु महाराज एवं शम्भु महाराज ने लखनऊ के कथक घराने को लोकप्रिय बनाया। वर्तमान में अच्छन महाराज के पुत्र पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज लखनऊ कथक घराने के सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि कलाकार के रूप में विश्वविख्यात हैं। उन्हांेने बताया कि कालका बिन्दादीन ड्योढ़ी कला जगत में श्रृद्धा का प्रतीक है, जहां भारत के लब्ध प्रतिष्ठ विभूतियों जैसे बेगम अख्तर, पं. भीमसेन जोशी, पं. उदय शंकर, उस्ताद अहमद जान थिरकवा, पं. गोपी किशन, सितारा देवी तथा सिद्धेश्वरी देवी ने अपनी कला से भावान्जलि दी है। श्रीमती मेश्राम ने कहा कि इस कथक संग्रहालय में लोगों को एक ही जगह पर सारी जानकारी मिलेगी। इस संग्रहालय के विकसित होने से जहां इसके इतिहास से लोग रूबरू होंगे, वहीं प्रदेश में पयर्टन को भी बढ़वा मिलेगा। साथ ही यह संग्रहालय भविष्य में कला के मुख्य स्थल के रूप में जाना जायेगा।

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