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कला की राजधानी है लखनऊ -नाईक

कला की राजधानी है लखनऊ -नाईक
लखनऊ, 10 मार्च। राज्यपाल राम नाईक ने गुरूवार को ललित कला अकादमी में आयोजित 57वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। राज्यपाल ने इस अवसर पर चित्रकारी कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को एक लाख रूपये, प्रशस्ति पत्र एवं पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया। सम्मान प्राप्त करने वाले कलाकारों में अमित कुमार मऊ उत्तर प्रदेश, धीरज यादव लखनऊ, कपाडिया गुलाम मनसुख भाई गुजरात, कौशिक शाहा, लोकनाथ प्रधान उड़िसा, माधवदास गुवहाटी, प्रतिभा अपूर्वा मध्य प्रदेश, पूजा मनराल कोलकाता, राधा—ष्ण राव कर्नाटक, राजीव कुमार, रवीन्द्र कुमार दिल्ली, शरद देवली महाराष्ट्र, स्वनेश गोवा तथा विपुल थे।
राज्यपाल ने मुख्य अतिथि के रूप में कहा कि कला का संप्रेषण भी एक कला है। कला के क्षेत्र में सिफारिश नहीं कडे़ परिश्रम की जरूरत है। परिश्रम के आधार पर ही सम्मान मिलता है। भारत में युवा आबादी देश की पूंजी है जिसका सही उपयोग करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश को कला के क्षेत्र में सम्पन्न बनाने का काम युवा पीढ़ी करें।
श्री नाईक ने कहा कि कला को आगे बढ़ाने के लिए समाज और सरकारें प्रोत्साहन दें। अपने देश की समृद्ध परम्परा है। लोग पूरे मनोयोग से कला को पोषित कर रहे हैं। लखनऊ कला की राजधानी है। वाराणसी सांस्कृतिक राजधानी है और मुंबई आर्थिक राजधानी है। मन में आने वाली बात को चित्रों के माध्यम से दिखाना कमाल की बात है। कलाकारों को उन्हें उनके कार्य स्थल की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए।

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