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मनुष्य होने का एहसास कराता है जीव-जन्तुओं का संरक्षण : डीएम

मनुष्य होने का एहसास कराता है जीव-जन्तुओं का संरक्षण : डीएम

आलोक पाठक

बहराइच 20 फरवरी। घर-घर की प्यारी गौरैया के संरक्षण के लिए संचालित अभियान सम्पूर्ण पक्षी प्रजाति के संरक्षण के लिए मील का पत्थर साबित होगा। पक्षी, जीव-जन्तुओं और पेड़ पौधों का संरक्षण करने पर हमें मनु’य होने का एहसास कराता है। अपने आर्थिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुन्ध दोहन करने वाले पूरे मानव समाज की नैतिक जिम्मेदारी है कि हम वन जीवों के संरक्षण में अपना सहयोग प्रदान करें। ऐसे लोग जो व्यक्तिगत स्तर पर कुछ नहीं कर सकते उन्हें चाहिए कि गर्मी के मौसम में अपने घर में कम से कम पानी का एक बर्तन अव”य रख दें ताकि प्यासे पशु-प़क्षी अपनी प्यास बुझा सकें।
‘‘विश्व गौरैया दिवस’’ को वृहद स्तर पर मनाये जाने एवं इस परिप्रेक्ष्य में आयोजित होने वाले जन-जागरूकता कार्यक्रमों की रूपरेखा निर्धारित किये जाने के उद्दे”य से कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी अभय ने यह बात कही। श्री अभय ने कहा कि वन एवं वन्यजीवों का संरक्षण प्रदेश सरकार की “शीर्ष प्राथमिकताओं में “शामिल है। प्रदेश में पक्षियों के संरक्षण के लिए जन-जागरूकता लाये जाने के उद्देश्य से पूर्व में वृहद स्तर पर बर्ड वाचिंग फेस्टिवल का सफलतापूर्वक आयोजन करने वाली प्रदेश सरकार ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए गौरैया पक्षी के संरक्षण का संकल्प लिया है।
जिलाधिकारी ने कहा कि अगर गौरैया पक्षी के संरक्षण की बात की जाय तो अब तक व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास किये जाते रहे हैं। लेकिन यह पहला अवसर है जब प्रदेश सरकार की अगुवाई में आमजन की सहभागिता से व्यापक स्तर पर संरक्षण के कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गयी है जिसके अच्छे परिणाम सामने आयेंगे। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों/कर्मचारियों, स्वैच्छिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, पक्षी प्रेमियों, मीडिया प्रतिनिधियों व आमजन से इस अभियान में सहयोग प्रदान करनेे की अपील की।
जिलाधिकारी ने डीआईओएस व बीएसए को निर्देश दिया कि जन-जागरूकता कार्यक्रमों को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग प्रदान करें। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों में अनिवार्य रूप से बर्ड नेस्ट स्थापित कराये जायेंगे। इसके लिए उन्होंने सीडीओ को विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित करने का निर्देश भी दिया। डीएम ने डीएफओ बहराइच एवं कतर्नियाघाट को निर्दे”ा दिया कि बर्ड नेस्टिंग के उपयोग में लाये जाने वाले मैटेरियल इत्यािद के बारे में फोल्डर तैयार कराएं तथा वृक्षारोपण के समय पीपल और बरगद जैसे पौधों को वरीयता प्रदान करें ताकि पक्षी अपना आशियाना बनाकर रह सकें।
बैठक का संचालन करते हुए वन संरक्षक/डीएफओ कतर्नियाघाट आशीष तिवारी ने बताया कि लगभग 02 वर्ष पूर्व विभागीय अधिकारियों प्रथम बार प्रदेश के मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर बर्ड नेस्ट स्थापित किये गये थे। जिनमें से कुछ
घोंसलों में गौरैया द्वारा नेस्टिंग प्रारम्भ कर देने से मा. मुख्यमंत्री ने पूरे प्रदेश में यह अभियान संचालित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि अभियान की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अपने पहले ही प्रयास में गिनिज़ बुक आॅफ रिकार्ड में नाम दर्ज कराने का प्रयास होगा।
श्री तिवारी ने बताया कि अप्रैल से जून-जुलाई तक बर्ड नेस्टिंग का समय होता है इसलिए इस बात का भरसक प्रयास किया जायेगा कि सभी लक्षित स्थानों पर मासान्त मार्च तक बर्ड नेस्ट स्थापित कर दिये जायें। उन्होंने बताया कि इन्टरनेट पर बर्ड नेस्ट के लगभग 150 माॅडल मौजूद हैं लेकिन बाम्बे नेचुरल बर्ड सोसाइटी के सहयोग से एक सबसे उपयुक्त माॅडल का चयन किया गया है। जिसके निर्माण पर लगभग 235=00 रूपये का खर्च आता है। उन्होंने बताया कि खर्च को कम रखने के लिए कार्डबोर्ड एवं प्लाईवुड से नेस्ट तैयार किया गया है परन्तु पक्षी पे्रमी अपनी पसन्द की लकड़ी का उपयोग कर बर्ड नेस्ट तैयार कर सकते हैं।
मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार ने कहा कि सृष्टि की रचना के समय लगभग 84 लाख योनियों का निर्माण हुआ था जिनके संरक्षण का उत्तरदायित्व मनु’यों का था। लेकिन हम रक्षक के बजाय भक्षक की भूमिका में आ गये। इसके प्रायश्चित के लिए हमें हर स्तर पर संरक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना होगा। वरि’ठ मीडिया कर्मी मुकेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि गौरैया संरक्षण की बात हमें ग्राम स्तर से “शुरू करनी होगी और पूर्व में इससे जुड़े लोगों को आगे लाना होगा।
डीआईओएस रवीन्द्र सिंह ने कहा कि गौरैया संरक्षण के अभियान से जनपद के सभी इण्टर काॅलेज़ों को जोड़ा जायेगा। इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सभी शिक्षण संस्थाओं के साथ बैठक कर अधिकाधिक बर्ड नेस्ट की स्थापना करायी जायेगी। डब्लूडब्लूएफ के वरि. परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने कहा कि गौरैया संरक्षण के कार्यक्रम में सरकार के “ाामिल हो जाने से इसकी सफलता की गारण्टी ली जा सकती है। परन्तु स्कूलों-कालेजों की सहभागिता से ही इस अभियान को जन-जन तक पहुॅचाया जा सकता है।
बैठक के दौरान पक्षी प्रेमी मुकेश जायसवाल, सेन्टर फाॅर इन्वायमेन्ट एजूकेशन के विपिन वर्मा, एसओएस टाइगर के फैज़ मोहम्मद खान, कतर्नियाघाट वेलफेयर सोसाइटी के आबिद रज़ा, पक्षी प्रेमी हफीज़ खाॅ इत्यादि ने गौरैया संरक्षण के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण सुझाव दिये। इस अवसर पर प्रभागीय वनाधिकारी बहराइच अखिलेश पाण्डेय, एसडीओ कतर्नियाघाट विनय कुमार श्रीवास्तव, अन्य जिला स्तरीय अधिकारी, “शैक्षिक संस्थाओं, स्वैच्छिक संगठनों तथा स्वयं सेवी संस्थाओं के पदाधिकारी, पक्षी प्रेमी एवं गौरैया संरक्षण के जानकार व्यक्ति तथा दोनों प्रभागों के वन क्षेत्राधिकारी व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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